Saturday, November 28, 2009

मिलने की तरह मिलना-

एक चांद बचा के रखना
मेरे लिए ढेरों सितारे
सूरज बचा के रखना
आकाश में बरसात के दिनों में
कभी कभार दिखने वाला
इंदधनुष भी बचा के रखना
पूरा बाग बगिया न सही
किसी पोथी पानडे
बरसों रखा एक फूल बचा के रखना
एक बच्चे की किलकारी
बचाना जरूर
चुटकी दो चुटकी ही सही
उम्मीद का कभी न छोड़ना संग
लाखों लाख शिद्दतों में भी
बचा के रखना उसे भी
अपने और मेरे लिए
विध्वंस के बावजूद
नामुराद हत्यारों से बचाना
बिदा मत होने देना
अपने चेहरे की जीवंत मुस्कान
मिलना मुझसे ठीक ठीक
मिलने की तरह मिलना ।
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अभिताभ नहीं हूं मैं
कि आप देवियों सज्जनों
मेरे स्वास्थ्य लाभ के लिए
प्रार्थना में जुट जाएं
फिल्में अधर में
निर्माता बेचारों के सौ करोड़
लटक जाए इतना तो नहीं
अभिताभ हूं मैं ।
पच्चीस करोड़ रूपए की लागत से
बन रही ''तीन पत्ती '' में
मैने नहीं किया काम
''शू बाइट '' में भी नहीं
'अलादीन ' में हर्गिज नहीं
पेट है लेकिन उसमें भूख के वक्त
मुआ मरोड़ उठता है
इसलिए नहीं कि आप देवियों सज्जनों
सिजदे में झुक जाएं
फिलवक्त ऐसा कुछ हुआ
सरकारी अस्पताल सलामत है
जहां डाक्टर मेरे स्वागत में नहीं
अपनी मांगों के लिए नारे लगा
हड़ताल करते मिलेंगे
माफ कीजिएगा अभिताभ नहीं हूं
इसीलिए कम्पाउण्डर ने दो गोलियां
चाय से गटकवा हाथा जोड़
बड़े शहर के अस्पताल में कूच करने की सलाह दी
इतलौती एम्बूलेंस के बारे में पता चला
वह बड़े डाकसाब के परिवार को
पिकनिक पर ले गई है।
ऐसा भी अभिताभ होने से
क्या फायदा देवियों सज्जनों
थिएटर डीवीडी के दर्शकों
आपको रोता बिलखता छोड़
मैं मरने लगू और आईसीयू में
भरती किए जाने के बजाए
बोलेरो वाले से हाथा जोड़ी के बीच
विकल्प हो भी क्या सकता है
सिवा मेरे मर जाने के ।
अभिताभ नहीं बन कर मैंने ठीक किया
यदि खुदा के फजल से अभिताभ
हो गया होता तो मेरे गुजरने पर
ऐश्वार्याजी की आंखें रो रो टपक पड़ती
यह अभिताभ को ही गंवारा नहीं
तब भला मुझ नाचीज को कैसे होता
अतएव अभिताभ नहीं होने का
फैसला अंततोगत्वा सुखद रहा
देवियों सज्जनों मेरा अभिताभ होना
उक्त हालात की वजह से मुल्तवी रहा ।
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